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Some Random Thoughts in Hindi
उच्छ्वास
आज साँसों का समर्पण!!
आखिरी पत्ते बचे जो,
आज सूखे से पड़े हैं,
तेरी आँधी में करूँ मैं,
खुद का अंतिम भाग तर्पण!
आज साँसों का समर्पण!!
आखिरी उच्छ्वास है ये,
जो बचा है पास मेरे,
अब न ज्यादा सह सकूँगा,
पग में तेरे प्राण अर्पण!!
आज साँसों का समर्पण!!
स्वप्न
जो लड़खड़ा रहा हूँ मैं
क्या स्वप्न का ये अंत है।
जो तिलमिलाता है कहीं,
वो दूर है या है यहीं।
जो सिसकियाँ हूँ सुन रहा,
वो कौन रोता है कहाँ।
जो द्वीप की तलाश में
है नाव गोता खा रही,
वो नाव में हूँ आज मैं
या नाव मैं ही बन गया।
है स्वप्न ये या स्वप्न से
अधूरी टूटी नींद है?
कुछ जल रहा है सच में
या जली हुई उम्मीद है?
जो स्वप्न ही है सच अगर
तो जागकर मैं क्या करूँ!
आरंभ ही जो अंत है,
तो अंत से मैं क्यूँ डरूँ?
आह्वान
तुझको पुकारा आज फिर मेरे हृदय ने!
सावन - घटा घनघोर थी छाई हुई,
मन में नयी थी एक मादकता भरी।
जलनिधि लहर सम मैं तरंगित हो उठा,
ऐसा लगा तुमने मुझे जैसे छुआ।
खुशियों भरी उन्माद के हों इस समय में,
आज फिर तुझको पुकारा इस हृदय ने।
खोकर खुदी को खोजने फिर मैं चला,
तस्वीर, तेरी बादलों की नीर में।
हर बूँद में दिखने मुझे जब तू लगी,
दिल में नयी तब एक सुंदरता जगी।।
सौंदर्य पूरित दिल के हैं मधुमय निलय में,
आज फिर तुझको पुकारा इस हृदय ने!!
स्याह नभ में भी एक दिख चाँद था,
हाँ बादलों से भी भरी उस रात में।
मग्न होकर देखने फिर मैं लगा,
मुखड़ा तेरा उस रात की बरसात में।।
दिल में बजे संगीत के हर एक लय में,
आज फिर तुझको पुकारा इस हृदय ने!!